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23 अग॰ 2019

DNA की संरचना और महत्व2021

DNA की संरचना और महत्व2021:

         


डीएनए, या डीओक्सीरिबोन्यूक्लिक एसिड, मानव में और लगभग सभी अन्य जीव में आनुवंशिक सामग्री है। किसी मानव के शरीर में लगभग हर कोशिका में एक ही डीएनए होता है। ज्यादातर डीएनए सेल नाभिक में स्थित है,

डीऑक्सीरिबोन्यूक्लिक एसिड एक अणु है जो कि सभी ज्ञात जीवों के विकास और प्रजनन में प्रयुक्त आनुवंशिक निर्देशों और कई वायरस डीएनए और आरएनए न्यूक्लिक एसिड हैं; प्रोटीन, लिपिड और जटिल कार्बोहाइड्रेट (पॉलिसेक्राइड) के साथ, वे चार प्रकार के अणुओं में से एक हैं जो जीवन के सभी ज्ञात रूपों के लिए आवश्यक हैं।

डीएनए संरचना एक जैविक जानकारी है, डीएनए, जैविक जानकारी भंडार करते हैं। जो डीएनए रीढ़ रिसाव के लिए प्रतिरोधी है, डीएनए मनुष्यों के लिए 98% से अधिक गैर–कोडिंग है जिसका मतलब है कि ये खंड प्रोटीन अनुक्रमों के लिए पैटर्न के रूप में नहीं करते हैं।

डीएनए डीआक्सीराइबोन्यूक्लिओटाइड्स का एक लंबा संपूर्ण बहुलक है जो पॉलीन्यूक्लियोटाइड, न्यूक्लियोटाइड्स के साथ मिल कर बना है डीएनए की लंबाई इसमें मिलने वाले न्यूक्लियोटाइड्स क्षार युग्म पर निर्भर है। मनुष्य के अगुणित डीएनए में 3.3109 क्षार युग्म है। न्यूक्लियोटाइड के तीन घटक होते हैं – पेंटोस शर्करा , डीएनए में डीआँक्सीरिबोज और एक फोस्फेट ग्रुप, नाइट्रोजनी क्षार।


क्षार दो प्रकार के होते है– 
यूरेसिल व थाइमीन, पायरिमिडीन ;साइटोसीन, व प्यूरीन्स ;एडेनीन व ग्वानिन। थाइमीन डीएनए में मिलता है जबकि साइटोसीन डीएनए व RNA दोनों में मिलता है। नाइट्रोजन ग्लाइकोसिडिक बन्ध नाइट्रोजनी क्षार द्वारा पेंटोस शर्करा से जुड़कर न्यूक्लियोसाइड
बनाता है

डीएनए की संरचना दो पॉलीन्यूक्लियोटाइड श्रंखलाओं (जिसका आधार शर्करा–फोस्फेट का बना होता है व क्षार भीतर की ओर होता है) का बना होता है

दोनों रज्जुकों के क्षार हाइड्रोजन बन्ध द्वारा युग्मित होकर क्षार युग्मक का निर्माण करते हैं।एडेनिन व थाइमिन दो हाइड्रोजन बन्ध बनाते हैं। ठीक इसी तरह से ग्वानीन साइटोसलीन से तीन–हाइड्रोजन बन्ध द्वारा बंधा रहता है इस श्रृंखला से डीएनए की संरचना का निर्माण होता है

डीएनए का महत्व


डीएनए की खोज जीन की पहचान और साथ ही प्रमुख बीमारियों को ट्रिगर करती है, विनाशकारी बीमारियों का इलाज करने के लिए ड्रग्स का निर्माण और चिकित्सीय उपचार में इसका योगदान महत्वपूर्ण है। वास्तव में इन जीनों की पहचान और उनके के विश्लेषण ने विज्ञान को प्रभावित किया है।

रोग निदान और उपचार: डीएनए आनुवंशिकी और चिकित्सा अनुसंधान में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

पितृत्व और कानूनी प्रभाव: डीएनए की खोज परिवारों के पितृत्व मामलों में इसका योगदान महत्वपूर्ण है।

फोरेंसिक और कृषि: डीएनए फॉरेंसिक विज्ञान और कृषि के क्षेत्र में महत्वपूर्ण है।

DNA के बारे में जानकारी

DNA – किसी भी जीवित गुण कोशिका में पाया जाने वाला गुणसूत्र है।
यह किसी घुमाव दार सिड़ी की तरह होता है।
सर्व मनुष्यों के DNA में 99.99% समानता होती है
मनुष्य और चिम्पांजी के DNA 98% मिलते हैं।
DNA कुल चार न्यूकिलयोटायडिन से बना हुआ होता है 1-ग्वानिनी 2-थाइमिन 3-साइटोसिन 4-अड़ेनिन
700 TB (terabyte) की जानकरी स्टोर करने के लिए सिर्फ 1 ग्राम DNA काफी होता है।
मानव शरीर में प्रति दिन 1000 से 10 लाख बार बनता और नष्ट होता है।
मानव का DNA 50% गोबी और केले से प्राप्त होता है।
सूर्य से निकलने वाली UV किरणे DNA को नष्ट कर सकती हैं।
DNA परीक्षण गाल की कोशिका, मूत्र के नमूने या फिर खून के नमूने से किया जाता है।


डी एन ए जीवित कोशिकाओं के गुणसूत्रों में पाए जाने वाले तंतुनुमा अणु को डी-ऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल या डी एन ए कहते हैं। इसमें अनुवांशिक कूट निबद्ध रहता है। डी एन ए अणु की संरचना घुमावदार सीढ़ी की तरह होती है।

डीएनए की एक अणु चार अलग-अलग रास वस्तुओं से बना है जिन्हें न्यूक्लियोटाइड कहते है। हर न्यूक्लियोटाइड एक नाइट्रोजन युक्त वस्तु है। इन चार न्यूक्लियोटाइडोन को अडेनिन, ग्वानिन, थाइमिन और साइटोसिन कहा जाता है। इन न्यूक्लियोटाइडोन से युक्त डिऑक्सीराइबोस नाम का एक शक्कर भी पाया जाता है। इन न्यूक्लियोटाइडोन को एक फॉस्फेट की अणु जोड़ती है। न्यूक्लियोटाइडोन के सम्बन्ध के अनुसार एक कोशिका के लिए अवश्य प्रोटीनों की निर्माण होता है। अतः डी इन ए हर एक जीवित कोशिका के लिए अनिवार्य है।

डीएनए क्रोमोसोम के रूप में होता है। एक कोशिका में गुणसूत्रों के सेट अपने जीनोम का निर्माण करता है; मानव जीनोम 46 गुणसूत्रों की व्यवस्था में डीएनए के लगभग 3 अरब आधार जोड़े है। जीन में आनुवंशिक जानकारी के प्रसारण की पूरक आधार बाँधना के माध्यम से हासिल की है।


DNA का संरचना तथा महत्व 


DNA अणु की दोनों पॉली न्यूक्लियोटाइड श्रृंखलाये के नाइट्रोजन बेस अणु आपस में हायड्रोजन बन्धो द्वारा जुड़े रहते है। इसके फलस्वरूप DNA अणु सीढ़ी जैसे रचना प्रतीत होती है ।सीढ़ी के दोनों समानांतर डण्डे शर्करा तथा फास्फेट अणुओ से बने होते है। सीढ़ी के आड़े डण्डे नाइट्रोजन बेसो के बने होते है DNA अणु एक अक्ष के चारो ओर सर्पिल रूप में लिपटा रहता है। डीएनए अणु का एक चक्कर 34 का होता है।इसमें दस नाइट्रोजन बेस जोड़े होते है अर्थात नाइट्रोजन बेस के मध्य की दुरी 3.4 होती है डीएनए अणु का व्यास 20 होता है। नाइट्रोजन बेस के जोड़े में एक प्यूरिन तथा एक पिरिमिडिन होता ।एडनिन तथा थायमिन के मध्य दो हायड्रोजन बन्धक तथा गवानीन और साइटोसिन के मध्य तीन हायड्रोजन बन्धक होते है अर्थात एडनिन थायमिन के एव गवानीन साइटोसिन के परिपूरक होते है ।विभिन्न डीएनए अणुओ के नाइट्रोजन बेस का अनुक्रम भिन्न भिन्न होता है

डीएनए का महत्व-

गुनसूत्रो की संख्या पीढी दर पीढी बनी रहती है
यह जैवीक क्रियाओं का नियंत्रण तथा नियमित करता है
यह आर ० एन० ए० का संश्लेषण करता है।

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