चंद्रयान-२ मिशन का उद्देश्य और प्रमुख तथ्य
चंद्रयान-२|Chandrayaan-2 का सफल परीक्षण
- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ( इसरो)ने अपने महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान 2 को अपने सबसे अधिक शक्तिशाली रॉकेट जीएसएलवी MK3 m1 के द्वारा श्री हरी कोटा (आंध्र प्रदेश) स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष से 22 जुलाई 2019 को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया।
- ISRO ने इस चंद्रयान-2 को लॉन्च करने की तिथि पूर्व में 15 जुलाई 2019 को सुनिश्चित करें दी गई थी किंतु रॉकेट के क्रायोजेनिक इंजन में रिसाव होने का पता लगने पर इस लॉन्चिंग को 22 जुलाई 2019 तक के लिए टाल दिया गया था।
- इसरो ने chandrayaan-2 के ऐतिहासिक प्रक्षेपण को आम जनता को देखने की अनुमति दी थी इसके चलते 7:30 हजार लोगों ने इस प्रेक्षण को देखने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण करवाया था।
क्या है chandrayaan-2?
- Chandrayaan 2 एक अंतरिक्ष यान है यह वस्तुत है चंद्रयान-1 का ही नवीन संस्करण है।
- इस यान के तीन प्रमुख ऐसे हैं जिनमें एक ऑर्बिटर दूसरा लैंडर (विक्रम) तथा तीसरा रोवर ( प्रज्ञान) शामिल है।
- Chandrayaan 1 केवल एक ऑर्बिटल था जिसने केवल चंद्रमा की कक्षा में परिक्रमा की थी जबकि chandrayaan-2 ने अपना लैंडर चंद्रमा की सतह पर उतारा।
- ऑर्बिटर चांद की सतह का नक्शा तैयार करेगा जबकि लैंडर तथा रोवर चांद की सतह पर उतर कर कार्य करेंगे।
चंद्रयान 2 मिशन का उद्देश्य:
इस मिशन का प्रमुख उद्देश्य चंद्रमा की सतह का नक्शा तैयार करना है इस पर खनिजों की उपस्थिति का पता लगाना है तथा चंद्रमा के बाहरी वातावरण को स्कैन करना है पता किसी न किसी रूप में पानी की उपस्थिति का पता लगाना भी इसका प्रमुख उद्देश्य है।
चंद्रयान 2 अन्य प्रमुख तथ्य:
- इसका वजन 3872 किग्रा है जबकि chandrayaan-1 का भार 1380 किलोग्राम था।
- यह 6000 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चंद्रमा की परिक्रमा करेगा इसमें स्वयं अपनी चाल को कम व अधिक करने की क्षमता है।
- यह चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरते समय स्वयं ही उतरने का स्थान सुनिश्चित करेगा।
- इस मिशन के लागत 978 करोड रुपए है।
- यह यान 48 दिनों की यात्रा के बाद चंद्रमा की सतह पर उतरेगा।
- यह यान अपने साथ 13 पेलोड (8 ऑर्बिटर,3 लैंडर, पर तथा 2 रोवर पर) लेकर रवाना हुआ है।
चांद की सतह पर पहुंचने का समय:
- 22 जुलाई से 23 अगस्त 2019 इस अवधि में chandrayaan-2 पृथ्वी के चारों ओर परिक्रमा करेगा।
- 13 अगस्त से 19 अगस्त 2019 तक चंद्रमा की ओर जाने वाली लंबी कक्षा में यात्रा करेगा।
- 19 अगस्त 2019 को यह यान चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश करेगा जहां यह 31 अगस्त 2019 तक चंद्रमा की परिक्रमा करेगा।
- 1 सितंबर 2019 को विक्रम लैंडर ऑर्बिटर से अलग होकर चंद्रमा से दक्षिण ध्रुव की ओर यात्रा करेगा।
- 10 अथवा 11 सितंबर 2019 को यह चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा।
- चंद्रयान 2 मिशन को चंद्रमा की सतह पर उतरने के साथ ही भारत पूर्व सोवियत संघ अमेरिका तथा चीन के बाद चंद्रमा की धरती पर यान उतारने वाला विश्व का चौथा देश बन जाएगा।
Important fact:
भारत में चंद्रयान-1 मिशन का प्रक्षेपण वर्ष 2008 को किया जिसमें 29 अगस्त 2009 तक कार्य किया तथा यह इस अवधि में चंद्रमा के 3400 चक्कर लगाए थे।
(Post by Mr Sunil Kumar)
Click here 👉👉👉👉👉
यदि आपको हमारी पोस्ट पसंद आई हो तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं लाइक जरूर करें व हमें फॉलो करें और इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि अन्य बच्चों को भी इसकी जानकारी मिले। इस प्रकार की बहुत सारी जानकारियां पाते रहने के लिए नीचे दिए गए ईमेल बॉक्स के अंदर अपनी ईमेल आईडी दर्ज करें।








0 Comments:
एक टिप्पणी भेजें