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14 जुल॰ 2023

मिशन चंद्रयान 3 की महत्वपूर्ण बातें 2023


मिशन चंद्रयान-3 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा भारतीय चंद्रमा मिशन का तीसरा मिशन है। यह मिशन चंद्रयान-2 के बाद आगे की उच्चतम सर्वोच्चता को प्राप्त करने का प्रयास है। यहां नीचे मिशन चंद्रयान-3 की कुछ महत्वपूर्ण बातें हैं:


मिशन का उद्देश्य: मिशन चंद्रयान-3 का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा के पास वस्त्र मिश्रित पानी (वॉटर आइस) की खोज करना है। इसके अलावा यह मिशन चंद्रयान-2 द्वारा शुरू किए गए चंद्रमा के उपकरणों के आगे की खोज और तकनीकी प्रगति को भी बढ़ाने का लक्ष्य रखता है।

अद्यतन किए गए प्रौद्योगिकी: मिशन चंद्रयान-3 में कई प्रौद्योगिकीयाँ मिश्रित की गई हैं। इसमें संकलन और प्रसंस्करण के लिए उपकरणों, स्वचालित अन्वेषण और प्राप्ति उपकरणों, नवीनतम नेविगेशन तकनीक, स्वचालित रूप से चंद्रमा की सतह को छूने वाले उपकरणों, और नई सूर्य चार्ज़ बैटरी तकनीक शामिल हैं।


चंद्रमा पर उपकरणों की ताकत: मिशन चंद्रयान-3 के तहत भारत चंद्रमा पर कई उपकरणों को भेजेगा जो विभिन्न परीक्षण और अनुसंधान कार्यों के लिए उपयोगी होंगे। इनमें शामिल हो सकते हैं उच्च-संकलन रेडार, ज़बरदस्ती रवाना करने वाला वाहन, सूर्य की किरणों को संग्रह करने का उपकरण, सतही विज्ञान और पाठशाला उपकरण, संगठित जनसंचार उपकरण, विज्ञान अध्ययन करने के लिए विज्ञान लैब आदि।

मिशन की योजना: मिशन चंद्रयान-3 में योजना यह है कि एक चंद्रमा रवाना करने वाली वाहन संचालित किया जाएगा, जिसमें विभिन्न उपकरण स्थापित होंगे। चंद्रमा पर पहुंचने के बाद, उपकरणों को उनके कार्यों को पूरा करने के लिए सक्रिय किया जाएगा। इन उपकरणों का उपयोग चंद्रमा की सतह का मैपिंग, चंद्रमा के उपकरणों का अवलोकन, रोवर के माध्यम से नमूने के संग्रह और उपकरणों के बीच संचार जैसे कार्यों के लिए होगा।

मिशन चंद्रयान-3 भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है जो चंद्रमा के संबंधित अनुसंधान और प्रौद्योगिकी में भारत को आगे बढ़ाने में मदद करेगा।


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7 जून 2021

Know why this happens? 2023||ऐसा क्यों होता है?

Know why this happens? 2023||ऐसा क्यों होता है?

✔️जहां ज्यादा पेड़ ,वहां ज्यादा बारिश क्यों होती है?

हमारा पर्यावरण: 

कभी ना होगा अपना मंगल काट दिए जो हमने जंगल।।

नाचे मोर कोयल भी गाये आवो पर्यावरण बचाएं।।

प्रकाश संश्लेषण (फोटोसिंथेसिस) की प्रक्रिया मैं CO2 (कार्बन डाइऑक्साइड) लेने और ऑक्सीजन बाहर निकालने के दौरान पेड़ों और उनकी पत्तियां मैं मौजूद पानी वास पानी भाप बनकर उड़ता रहता है लेकिन यह प्रक्रिया हमें दिखाई नहीं देती ।
Know why this happens? 2021||ऐसा क्यों होता है?

तेज गर्मी पड़ने पर समुद्र नदी झील का पानी सूर्य की तपिश से वाष्प बनकर उड़ जाता है इसी वाष्पीकरण के कारण आसमान में बादल बनते हैं उन बादलों में पेड़ों से वाष्प बनकर उड़ने वाला पानी भी मिल जाता है इससे बादल भारी हो जाते हैं और बरस पड़ते हैं।
 इसीलिए जिस स्थान पर पेड़ ज्यादा होते हैं वहां पानी ज्यादा बरसता है।

अगर राजस्थान की बात करें तो राजस्थान राज्य में पेड़ों की कमी है इसीलिए वहां बादल तो बनकर उड़ते हैं लेकिन अक्सर पेड़ों द्वारा वाष्पीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के चलते बादल भारी नहीं होते और हवा के साथ आगे निकल जाते हैं माना जाता है कि जितने घने जंगल होते हैं वहां उतनी ज्यादा बारिश होती है।

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18 अप्रैल 2021

यौन शिक्षा क्यों आवश्यक है2023?|Why sex education is necessary?

किशोरों के लिये यौन शिक्षा क्यों आवश्यक है2023 ?

किशोरावस्था (10-19 वर्ष) वाल्यावस्था और वयस्कता के बीच की नाजुक अवस्था है । इस अवस्था में उत्तेजना, साहस, भावुकता और काम के प्रति उत्सुकता स्वाभाविक रूप से उत्पन्न होती है। यदि इस अवस्था में होने वाले परिवर्तनों को सही तरीके से नहीं समझा जाये तो किशोर किशोरियाँ गलत रास्ते या भटकाव भरे जीवन में जा सकते है। अत: यौन शिक्षा के माध्यम से किशोरों को किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक तथा सामाजिक परिवर्तनों, यौन एवं यौन संक्रमित रोगों की वैज्ञानिक जानकारी दी जाना आवश्यक है। जिससे उनका शरीर स्वस्थ्य रहे और वे अज्ञानता और भ्रमों से बच सकें।

प्रजनन स्वास्थ्य क्या हैं ?

आमतौर पर प्रजनन स्वास्थ्य का मतलब है, प्रजनन से संबंध रखने वाले सभी मामलों एवं अंगों का सही काम करना तथा उनके स्वस्थ्य रहने से है। साथ ही प्रजनन स्वास्थ्य में संतोषजनक और सुरक्षित लैंगिक जीवन, शिशु प्रसवन क्षमता और इस संबंध में स्वेच्छा से कब और कितने अंतराल पर ऐसा किया जाये, यह निर्णय लेने की स्वतंत्रता शामिल है।

प्रजनन क्या हैं ?

सभी सजीव प्रजनन करते हैं। प्रजनन को उस प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जिसके द्वारा कोई जीव अपनी जाति को बनाये रखता है। स्त्री और पुरूष प्रजनन प्रणाली का अंतर प्रजनन चक्र में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका के कार्य निष्पादन पर आधारित है।

मानव प्रजनन प्रक्रिया में दो तरह की लिंग कोशिकाएं संबद्ध है : पुरूष (शुक्राणु) और स्त्री (डिम्ब)। स्वस्था और लैंगिक दृष्टि से परिपक्व पुरूष लगातार शुक्राणु पैदा करते है। जब एक युवती स्त्री 12 या 13 वर्ष की तरूणावस्था को प्राप्त कर लेती है तो प्रत्येक 28 दिन के बाद उसे डिम्वाशय एकांतर रूप से एक डिम्ब विस्तृत करते करते है । यह प्रक्रिया तब तक चलती रहती है जब तक स्त्री का मासिक धर्म समाप्त नहीं हो जाता, सामान्यत: 50 वर्ष की उम्र तक।

स्त्री को अपने डिम्ब के गर्भधारण के लिए एक पुरूष की आवश्यकता होती है। शुक्राणु और डिम्ब, स्त्री की गर्भाशय नली में मिलते है और एक नये व्यक्ति की रचना आरंभ करते है। इसके बाद स्त्री उस संतान को गर्भावस्था से शिशुजन्म तक धारण करती है।

पुरूष और स्त्री के प्रजनन अंग और उनके कार्य ::पुरूष के प्रजनन अंग:

शिश्न (लिंग)(Penis)
पेशाव नली (मूल नलिका) (Urethra)
अंडकोष (Testes)
अंडकोश की थैली (Scrotum)
वीर्य नलिका
वीर्यकोष(Seminal Vesicles)

शिश्न (लिंग) :-
यह पुरूषों का वह अंग है, जो संभोग क्रियसा में कार्य करता है । इसमें मूत्र विसर्जन और वीर्यस्खलन का द्वार होता है ये दो क्रियाएं अलग-अलग समय पर ही हो सकती है। हर व्यक्ति के शिश्न की लंबाई अलग-अलग होती है, किन्तु इससे इसके कार्य का कोई संबंध नहीं होता।

मूत्र नलिका :-
शिश्न के अंदर एक पतली नली होती है, जो मूत्र नलिका या पेशाब की नली कहलाती है। इसके दो कार्य होते है। पहला संभोग के समय वीर्य का स्खलन और दूसरा शरीर से पेशाव निकलना।

अंडकोष :-
यह उसे गोलागार पिण्ड है। इनमें शुक्राणु बनते है, इसमें एक ग्रंथि होती है, ये ग्रंथियां पुरूष के खास हारमोन्स (एक प्रकार के रासायनिक पदार्थ) भी बनाती है। यह पुरूषों में पुरूषत्व वाले गुण पैदा करती है। जैसे-ढाढ़ी, मूँछ के बाल उगना, आवाज का भारी होना, आदि इन्हीं हारमोन्स के कारण होता है। इसका विस्तार विवरण किशोरावस्था में होने वाले परिवर्तन के पृष्ठ में है।

अंडकोष की थैली :-
यह एक थैली होती है, जिसमें दोनों अंडकोष रहते है। यह शिश्न के पीछे तथा दोनों तरफ स्थित होती है।

वीर्य नलिकाएँ :-
यह संख्या में दो होती है दोनों अंडकोशों से एक-एक नलिका निकलती है और जाकर पेशाब की नली से मिल जाती है। यह नलिकाएॅं अंडकोष में बनने वाले शुक्राणु को पेशाब की नली तक ले जाती है। यह शरीर के अंदर होती है इसलिये बाहर से दिखाई नहीं देती। पुरूष में पेशाब और वीर्य को बाहर लाने का एक ही रास्ता है जबकि स्त्रियों में ऐसा नहीं होता उनके प्रजनन अंगों की संरचना अलग होती है।

पोस्ट्रेट ग्रंथी :-
इन ग्रंथियों में शुक्राणुओं के लिये द्रव होता है। यह शुक्राणुओं को पौस्टिक द्रव देती है। जो शुक्राशय में होता है।

स्त्री के प्रजनन अंग: -

भगशिशन (Clitoris)
योनि (Vagina)
योनि माग Z (Cervix)
गर्भाशय (Uterus)
डिम्ब नलिका (Fallopian Tube)
डिम्ब कोष

भगशिश्न :-
यह स्त्रियों के गुप्त अंग का एक बाहरी भाग है, यह छोटा, गोल-सा मटर के दाने के बराबर मांसपिंड होता है, जो पेशाब की नली के सुराख (छिद्र) के ऊपर होता है। यह संभोग के समय अत्यंत संवेदनशील हो जाता है और उत्तेजना पैदा करने का कार्य करता हैं।

योनि :-
योनि योनिद्वार के छिद्र बीच में उपस्थित होता है। एक ओर पेशाव के रास्ते और गुदा के बीच में योनिद्वार होता है। योनि एक झिल्लीयुक्त रास्ता है यह एक और तो बाहर की तरफ खुलता है, और दूसरी ओर गर्भाशय की गर्दन तक पहुंचता है योनि बहुत ही लचीली होती है इसका कार्य है, शिशु का जन्म तथा संभोग क्रिया।

योनि के कार्य :-
संभोग के दौरान पुरूष उत्तेजित शिश्न और वीर्य को प्राप्त करती है।
अशिशु जन्म के दौरान स्त्री के शरीर से शिशु के बाहर निकलने का रास्ता है।
मासिक स्राव के दौरान स्त्री के गर्भाशय से रक्तस्त्राव को शरीर से बाहर निकलने का रास्ता देती है।

योनि मार्ग :-
यह एक रास्ता या नाल है जो यानिक से गर्भाशय तक जाता है, और गर्भाशय के निचले हिस्से की रचना करता है।

गर्भाशय :-
यह मांसपेशियों से बना नाशपाती के आकार का एक खोखला अंग है। इसकी दीवारें बहुत मजबूत होती है। इसके अदर झिल्ली की एक तह (परत) होती है। जिसे एन्ड्रोमीट्रियम (Endometrium) कहते है। मासिक धर्म के समय झिल्ली की यह परत नष्ट होकर रक्त के साथ गिर जाती है और हर माह गर्भाशय एक नई परत बनाता है। गर्भावस्था में शिशु गर्भाशय के अंदर बनता और बढ़ता एवं नौ माह उपरांत शिशु का जन्म होता है। गर्भाशय की लंबाई 7.5 सेमी और चौड़ाई 5 सेमी. होती है।

डिम्ब नलिका :-
इन्हें डिम्ब नाल या बीज नाल भी कहा जाता है। यह दो होती है, स्त्री की डिम्ब इन्हीं नालों (Fallopian Tube) से होकर गर्भाशय में आती है।

डिम्बकोष:-
यह दो अंडाकार ग्रंथियॉं है। इनसे एस्ट्रोजन और प्रोजोसट्रोन नाम के दो हारमोन्स निकलते है जो स्त्रियों का खास हारमोन्स है। डिम्बकोष बारी-बारी हर महिने एक डिम्ब (अण्डाणु) पैदा करता है। यह डिम्ब डिम्बनाल के चौंडे कीप जैसे मुॅंह द्वारा अंदर ले लिया जाता है। यहॉं से यह गर्भाशय की ओर चल पड़ता है। यह प्रक्रिया डिम्ब-उत्सर्ग कहलाती है। इस यात्रा में अगर डिम्ब पुरूष के शुक्राणु से मिलता है तो स्त्री का गर्भ ठहर जाता है। डिम्ब और शुक्राणु का मिलन संभाग द्वारा होता है।
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17 फ़र॰ 2021

REET-2023 science model test paper

 

2 जन॰ 2021

एवियन इनफ्लुएंजा वायरस क्या है? यह कैसे फैलता है जानिए इसके लक्षण 2021

एवियन इनफ्लुएंजा वायरस

राजस्थान के झालावाड़ जिले में एक नया वायरस ने दस्तक दी है जिसके कारण आसपास के कई क्षेत्रों में पक्षियों की मौत का मामला सामने आया है जिसमें कौवे की मौतें हुई है।

यह पक्षियों के लिए सबसे ज्यादा घातक वायरस है इसके अलावा यह इंसानों के लिए भी घातक है जो लोग पक्षियों के संपर्क में रहते हैं यह वायरस इतना घातक है कि इससे मिलकर भी हो सकती है आपको बता दें बर्ड फ्लू का पहला मामला 1990 में सामने आया जब इंसानों में इस वायरस की पुष्टि की गई वैसे कुछ ही दिन में एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को बर्ड फ्लू हुआ हो इसके अलावा अभी तक इंसानों से इंसानों में स्पश्ठ  नहीं है लेकिन यदि दो इंसानों के बीच व्यक्तिगत संपर्क हो जाए तो यह वायरस फेलता  है।

कुछ तरह (स्ट्रेन) के इन्फ़्लुएंज़ा वायरस, जो मुख्य रूप से पक्षियों को संक्रमित करते हैं, लेकिन ये मनुष्यों को भी संक्रमित कर सकते हैं.
इस तरह का फ्लू अक्सर ही बीमार पक्षियों के संपर्क में आने से होता है. यह व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी फैल सकता है।

एवियन इन्फ्लूएंजा

एवियन इन्फ्लूएंजा (एआई) को आमतौर पर बर्ड फ्लू (पक्षियों का वायरल रोग) के रूप में जाना जाता है। यह संक्रामण (इन्फ़ैकशन) इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण होता है। वायरस संक्रमित पक्षी से मनुष्यों में फैलता है और बीमारी पैदा करता है। एवियन इन्फ्लूएंजा का संक्रमण घातक होता है और इससे मृत्यु होने की संभावना काफी अधिक होती है। इस घातक संक्रमण से ज्यादातर मुर्गियाँ, बतख और हंस प्रभावित होते हैं। पोल्ट्री पक्षियों में इसकी संवेदनशीलता काफी अधिक होती है। एवियन इन्फ्लूएंजा से पीड़ित अधिकतर लोगों को संक्रमित पक्षियों के साथ निकट संपर्क देखा गया था। यह संक्रमण हवा की बूंदों या धूल में पाए जाने वाले वायरस से भी फैलता है। यह सांस लेते समय लोगों के अंदर चला जाता है और लोगों को प्रभावित करता है। 

एवियन इन्फ्लूएंजा से पक्षी किस प्रकार संक्रमित होते हैं?

इस संक्रामण के जिम्मेदार वायरस, ऑर्थोमीक्सोविरिडा परिवार के इन्फ्लुएंजा ए जीनस से संबंधित है। दुनिया भर में, इस प्रकार का एक वायरस स्वाभाविक रूप से जलीय पक्षियों में पाया जाता है। संक्रमित पक्षी एवियन इन्फ्लूएंजा ए वायरस को अपनी लार, नाक स्राव और मल के जरिए अतिसंवेदनशील पक्षियों में संक्रमण फैला सकते हैं। LPAI (कम रोगजनक एवियन इन्फ्लुएंजा) HPAI (अत्यधिक रोगजनक एवियन इन्फ्लुएंजा) की तुलना में कम संक्रामक है। HPAI वायरस शरीर के कई आंतरिक अंगों को प्रभावित कर सकता है और इसके कारण 48 घंटों के भीतर मृत्यु दर 90% -100% तक हो सकती है।

एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस के बारे में हम और क्या जान सकते हैं?

एवियन इन्फ्लुएंजा ए वायरस में महामारी इन्फ्लूएंजा उत्पन्न करने की क्षमता होती है इसलिए यह लोगों के स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण विषय है। सबटाइप ए (H5N1) और ए (H7N9) ने लोगों में गंभीर संक्रमण पैदा किया है। दूसरी ओर, H7N3, H7N7 और H9N2 से भी लोग काफी मात्रा में संक्रमित हुए हैं।

लोग एवियन इन्फ्लूएंजा के संपर्क में कैसे आते हैं? 

एवियन इन्फ्लूएंजा ए वायरस व्यक्ति की आंख, मुंह या नाक के माध्यम से प्रवेश कर सकता है। संक्रमण तब हो सकता है जब वायरस हवा की बूंदों या धूल में होता है और व्यक्ति इसे सांस लेता है या किसी ऐसी चीज को छूता है जो इससे दूषित होती है। यह ज्यादातर तब होता है जब कोई व्यक्ति एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस से संक्रमित पक्षियों या सतहों के साथ असुरक्षित संपर्क में आता है।

एवियन इन्फ्लुएंजा वायरस कैसे फैलता है?


अत्यधिक रोगजनक एवियन इन्फ्लूएंजा ए (H5N1) वायरस संभवतः निम्न तरीके से फैलता है:

👉पक्षी से लोगों में 
👉पर्यावरण से लोगों में 
👉एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में (बहुत कम/निरंतर)
👉लोगों में इसके फैलने का प्रमुख कारण संक्रमित पॉल्ट्री और दूषित सतह और वायु में वायरस का होना है

एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस के लिए रोग उत्पन्न करने की अवधि कितनी है?


डब्ल्यूएचओ के अनुसार वर्तमान डेटा निम्नलिखित तथ्यों के बारे में बताता है:

इन्फ्लुएंजा ए (H5N1) वायरस की रोग उत्पन्न करने की अवधि औसतन 2 से 5 दिन है और 17 दिनों तक रहती है।
इन्फ्लुएंजा ए (H7N9) वायरस रोग उत्पन्न करने की अवधि औसतन 5 दिन है और 1 से 10 दिनों तक रहती है।
स्वाइन इन्फ्लूएंजा वायरस रोग उत्पन्न करने की अवधि 2-7 दिनों तक है।

(Post by Mr Sunil)
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16 दिस॰ 2020

200+मसालों और कुछ औषधीय पौधों की वैज्ञानिक नाम।

मसाले और औषधीय पौधों के वैज्ञानिक नाम:

नमस्कार!
यहां पर मसालों और कुछ औषधीय पौधों की वैज्ञानिक नाम के बारे में बताने वाले हैं जो बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रखते हैं जो विद्यार्थी विज्ञान विषय से संबंधित है उनको यह वैज्ञानिक नाम याद रखना चाहिए।
यह वैज्ञानिक नाम एग्जाम्स में बार-बार पूछे जा रहे हैं इसीलिए हमने आपके लिए कुछ आसान तरीके में वैज्ञानिक नाम को अलग-अलग करके लिखे हैं ताकि किसी भी विद्यार्थी को परेशानी ना हो।

मसालों के वैज्ञानिक नाम:-

लौंग                      साइजीजियम एरोमेरिकम
काली मिर्च              पाइपर नाईगरम
अदरक                   जिंजीबर ऑफाइसिनेल
हल्दी                      कुरकुमा लोंगा
जीरा                       क्यूमिनम सायमिनम
सोफ                     फनिकुलम वल्गर
हींग                      फेरुला आसाफॉयिटीडा

औषधीय पौधों की वैज्ञानिक नाम:-

नीम                    एजीडिरेक्टा इंडिका
चाय                   केमेलिया सायनेंसिस
कॉफी                 कोफिया अरेबिका
सर्पगंधा               रावल्फिया सरपेंटाइना
सिनकोना             सिनकोना स्पी.
धतूरा                 डटूरा स्ट्रेमोंनियम
सफेद मूसली        क्लोरोफाइट्स  बोरीविलीएनम
ईसबगोल             प्लांटेगो ओवेटा
अश्वगंधा              विथानिया सोमनिफेरा 
कुनेन                  सिनकोना स्पी.
टेक्सस                टेक्सस स्पी.

 (Post by Mr Sunil)

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(Mr Sunil Kumar)

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100+ जीवों और पादप के वैज्ञानिक नाम सबसे अधिक लोकप्रिय।

वैज्ञानिक नाम:

(Writer Mr.Sunil)

विभिन्न जीवों के स्थानीय साधारण नाम भिन्न स्थानों पर भिन्न-भन्न होते हैं।
 जो कि उनके अध्ययन को कठिन बना देते हैं।

जीवो की वैज्ञानिक नाम में प्रथम पद वंश का नाम होता है और दूसरा पद जाति का नाम या जाति संकेत पद होता है(लीनियस के अनुसार)
यह नाम लैटिन भाषा में लिखे जाते हैं क्योंकि यह मातृभाषा होती है और इसमें कोई परिवर्तन  नहीं होता है।


 
हम यहां पर प्लांट ओर एनिमल के कुछ उदाहरण ले रहे हैं:-


Scientific names:-

आम---मैग्नीफेरा इंडिका
धान---औरिजया सैटिवाट
गेहूँ---ट्रिक्टिकम एस्टिवियम
मटर---पिसम सेटिवियम
सरसोँ---ब्रेसिका कम्पेस्टरीज
मोर---पावो क्रिस्टेसस
हाथी---एफिलास इंडिका
डॉल्फिन---प्लाटेनिस्टा गैँकेटिका
कमल---नेलंबो न्यूसिफेरा गार्टन
बरगद---फाइकस बेँधालेँसिस
घोड़ा---ईक्वस कैबेलस
गन्ना---सुगरेन्स औफिसीनेरम
प्याज---ऑलियम सिपिया
कपास---गैसीपीयम


मुंगफली---एरैकिस हाइजोपिया
कॉफी---कॉफिया अरेबिका
चाय---थिया साइनेनिसस
अंगुर---विटियस
हल्दी---कुरकुमा लोँगा
मक्का---जिया मेज
टमाटर---लाइकोप्रेसिकन एस्कुलेँटम
नारियल---कोको न्यूसीफेरा
सेब---मेलस प्यूमिया/डोमेस्टिका
नाशपाती---पाइरस क्यूमिनिस
केसर---क्रोकस सैटिवियस
काजू---एनाकार्डियम अरोमैटिकम
गाजर---डाकस कैरोटा
अदरक---जिँजिबर ऑफिसिनेल
फुलगोभी---ब्रासिका औलिरेशिया
लहसून---एलियम सेराइवन
बाँस---बेँबुसा स्पे
बाजरा---पेनिसिटम अमेरीकोनम
लालमिर्च---कैप्सियम एनुअम
कालीमिर्च---पाइपर नाइग्रम
बादाम---प्रुनस अरमेनिका
इलायची---इलिटेरिया कोर्डेमोमम
केला---म्यूजा पेराडिसिएका
मुली---रेफेनस सैटाइविस
जामुन---शायजियम क्यूमिनी.
मनुष्य---होमो सैपियंस
मेढक---राना टिग्रिना
बिल्ली---फेलिस डोमेस्टिका
कुत्ता---कैनिस फैमिलियर्स
गाय---बॉस इंडिकस
भैँस---बुबालस बुबालिस
बैल---बॉस प्रिमिजिनियस टारस
बकरी---केप्टा हिटमस
भेँड़---ओवीज अराइज
सुअर---सुसस्फ्रोका डोमेस्टिका
शेर---पैँथरा लियो
बाघ---पैँथरा टाइग्रिस
चीता---पैँथरा पार्डुस
भालू---उर्सुस मैटिटिमस कार्नीवेरा
खरगोश---ऑरिक्टोलेगस कुनिकुलस. 
हिरण---सर्वस एलाफस
ऊँट---कैमेलस डोमेडेरियस
लोमडी---कैनीडे
लंगुर---होमिनोडिया
बारहसिँघा---रुसर्वस डूवासेली
मक्खी---मस्का डोमेस्टिका


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15 दिस॰ 2020

कोशिका सिद्धांत (Cell Theory) क्या है जानें आसान तरीके से।

कोशिका सिद्धांत (Cell Theory)

Cell theory: 



*कोशिका सिद्धांत मैथियास जैकब श्लाइडेन (Mathias Jacob Scliden, 1838) व थियोडोर श्वान (Theodore Schwann, 1839) ने दिया। 


* उन्होंने कहा की पादपों तथा जंतुओं का शरीर कोशिका तथा कोशिका के उत्पादों से मिलकर बने है।



*सर्वप्रथम रुडोल्फ विर्चो (Rudolf Virchow) ने बताया की ओमनिस सेलुला–इ–सेलुला (Omnis Cellulaie Cellula means all cells arise from pre-existing cells ) अथार्त कोशिका विभाजित होती है।



* और नई कोशिकाओं की उत्पति पूर्ववर्ती (pre-exiting) कोशिकाओं के विभाजन से होती है।

*आधुनिक कोशिका सिद्धांत (Modern cell theory)


रुडोल्फ विर्चो (Rudolf Virchow) ने श्लाइडेन व श्वान के इस सिद्धांत में बदलाव कर नया कोशिका सिद्धांत प्रतिपादित की, जिसे आधुनिक कोशिका सिद्धांत (Modern cell theory) कहते है।

 जिसके अनुसार-

*प्रत्येक सजीव का शरीर एक या अधिक कोशिकाओं से बना होता है।



*कोशिका सजीवों की संरचनात्मक एंव क्रियात्मक इकाई (Structural and functional unit) है।



*सभी कोशिकाओं आधारी रूप से (basically) एक समान होती हैं। जिसमें जीवद्रव्य (Cytoplasm), केन्द्रक (Nucleus) एवं कोशिकांग (Organelles) होते है।



*कोशिका पर पतली कोशिका झिल्ली (Cell memberane) एवं कोशिका भित्ति (Cell wall) का आवरण होता है।

* कोशिका भित्ति केवल पादप कोशिकाओं (Plant cells) में पाई जाती है, प्राणी कोशिकाओं (Animal cells) में नहीं पाई जाती है।



*सभी कोशिकाओं का रासायनिक संगठन (Chemical compostion) एंव उपापचयी क्रियाएँ (Metabolic reaction) एक समान होती हैं। 



*इसलिए कोशिका को सजीवों की क्रियात्मक इकाई (Functional unit) कहा जाता है।



*नईकोशिकाएँ पूर्ववर्ती कोशिकाओं के विभाजन से बनती है।



*कोशिकाआनुवंशिक पदार्थ उपस्थित होता है जो एक सन्तति से दूसरी सन्तति में वंशागत होता है। इसलिए कोशिका को वंशागति की इकाई  (unit of heredity) कहा जा सकता है।

*कोशिका सिद्धांत के अपवाद (Exeption of Cell Theory)


कोशिका सिद्धांत के अपवाद  निम्न  है-

(I) विषाणु (Virus) 

8*वायरस अकोशिकीय होते है इनमें केवल न्यूक्लिक अम्ल  (DNA अथवा RNA) और प्रोटीन  होता है।



(II) विषाणु कण/ विरोइडस (Viriods)

विरोइडस केवल आरएनए कण को कहा जाता है।



(III) विरिओन (Virions) 

ये विषाणुविय जीनोम के निष्क्रिय वाहक (Inactive carrier) होते हैं।



(IV) प्रीओन (Prions)

ये विषाणु का बाहरी केवल प्रोटीन का आवरण होता है  इनमें न्यूक्लिक अम्ल अनुपस्थित होते है।



(V) लाल रक्त कणिकाएँ (RBC) 

स्तनधारियों के रक्ताणु में केन्द्रक अनुपस्थित होता है। ऊँट व लामा के आरबीसी में केन्द्रक उपस्थित होते है।



(VII) लसिकाणु (Lymphocytes)

बी और टी लसिकाणु में प्रारुपी आनुवांशिक पदार्थ (Formative genetic material) अनुपस्थित होते हैं।

 

इनको के निम्न कारणों से अपवाद कहा जाता हैं –



*इनमें कोशिका झिल्ली, जीवद्रव्य, कोशिकांगो, एन्जाइम तथा अन्य कोशिकीय अवयव (Cell Componant) आदि का अभाव होता है।



*इनमें विभाजन की क्षमता नहीं पाई जाती है। इनकों विभाजन के लिए जीवित परपोषी कोशिका (Live host cell) की आवश्यकता है।


*सामान्यत: इनमें DNA अथवा RNA में से कोई एक ही उपस्थित होता है। जबकि प्रत्येक कोशिका में दोनों केन्द्रक अम्ल पाये जाते हैं।


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