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13 दिस॰ 2020

कार्डेटा संघ के प्रमुख वर्ग (Phylum Chordata Classes)2021

नमस्कार!
इससे पहले हमने नॉन कोर्डेटा के वर्गीकरण के बारे में पूरी तरह से जाना और आज हम कोर्डेटा के बारे में उसके वर्गीकरण का उल्लेख करेंगे।

संघ कोर्डेटा का वर्गीकरण:


इस में आने वाले जीवो में पृष्ठ रज्जु व पृष्ठ तंत्रिका रज्जू उपस्थित युगमित ग्रशनी कलोम छिद्र उपस्थित हृदय अदर बाग में उपस्थित होता है।
यह निम्न होते हैं:

पिशीज
एंफिबिया
रिफ्टिलिया
एवीज
मेंमेलिया

पिशीज:

A. कड्रिकथिज - अंत: कंकाल उपास्थिल बाह्य कंकाल प्लेकॉयड शलको का बना हुआ हैं।
 पृष्ठ रज्जु चिर स्थाई मुख सिर के अंदर तल पर 5 SE 7 जोड़ी गिल दरार इन पर oper kulam  अनुपस्थित होता है।
वायु कौशिक अनुपस्थित होता है इसीलिए यह लगातार करते रहते हैं या यूं कहें कि इन्हें लगातार तैरना पड़ता है।
इनमें अंड प्रजक या शिशु प्रजक असम तापी शरीर का तापमान नियंत्रण करने की क्षमता नहीं होती है ।
उदाहरण: कुत्ता मछली (स्कोलियो डोंन)

B. ओस्ट्रियोकथिज - अंत: कंकाल अस्थिल सतह पर सिक्लॉयड शलक मुख अग्र सिरे के अंत में 4 जोड़ी क्लॉम् छिद्र ऑपरकलोम से ढकी हुई वायु कोष उपस्थित हृदय दो कक्षीय एक आलिंद और एक निलय  पाया जाता है।
यह असम तापी होते हैं और एक लिंगी अंडज होते हैं।
उदाहरण: हिप्पोक्रेट्स (समुद्री घोड़ा), लबिया, कतला मछली।

एंफिबिया:

इस उप वर्ग में आने वाले जीव उभय चर शरीर सिर व गर्दन में विभाजित होता है।
कुछ जीवो में पूछ भी उपस्थित होती है इनकी त्वचा नम होती है तथा ग्रंथि श्लेष्मा ग्रंथि कुछ में विष ग्रंथि पाई जाती है।
 असम तापी होते हैं। इनमें heart-तीन कक्षक होते है दो आलिंद और एक निलय पाया जाता हैं।
इनमें कलॉम् फुसफुस  के द्वारा होता है।

रिफ्टिलिया:

इस वर्ग में आने वाले जीव रेंग कर चलने वाले होते हैं इन जीवन में पूछ सिर गर्दन पाई जाती है इनमें 2 जोड़ी पैर होते हैं की स्थली होते हैं इनकी त्वचा शलकिय शुष्क व ग्रंथि विहीन होती है इनमें अंत:कंकाल अस्थियों का बना होता है।
इनका हृदय अपूर्ण रूप से 4 कक्षी है।
लेकिन मगरमच्छ में पूरी तरह से विभा जीत है।
इनमें से बड़ों के द्वारा श:वसन होता है यह एक लिंगी होते हैं इनमें आंतरिक निषेचन काहे जाता है इन में प्रत्यक्ष परिवर्तन होता है 
उदाहरण: viper Naja, क्रोकोडाइल, किलोन, alligator।

एवीज:

इस वर्ग में सभी पक्षी आते हैं जो उड़ने की क्षमता रखते हैं।
(अपवाद शुतुरमुर्ग ,कीवी तथा पेंग्विन )शरीर परों से ढके हुए होता है।
इनकी त्वचा शुष्क होती है । ग्रंथि विहीन मुख के अग्रभाग में चोच सिर व पूछ छोटी , अग्र पाद पंखों में रूपांतरित हो जाते हैं
इनकी अस्थियां खोखली  होती है । वायु कोष युक्त  होती है।
पाचन तंत्र में ग्रसिका अन्नपुट तथा  आमाशय में पेषनी उपस्थित होती है। हिरदे इनका 4 कक्षी होता है। यह जीव समतापी होते हैं। इनमें फुसफुस के द्वारा श वशन होता है।
यह अंड प्रजक होते हैं।
उदाहरण: पे वो , कोलुंबा, कवर्ड।

मेंमेलिया: 

इस  वर्ग में आने वाले जीव सबसे विकसित वर्ग के माने जाते हैं। मेमो का अर्थ स्तन ग्रंथि होता है।
यह जीव क्षमता भी होते हैं उनकी त्वचा पर बाल पाए जाते हैं मादा में स्तन ग्रंथियां पाई जाती है जो शिशु को पोषण प्रदान करती है इनमें बाह्य कर्ण पल्लव उपस्थित होते हैं इनमें चार कोष्ठिय  हृदय पाई जाता है तथा परिसंचरण तंत्र दोहरा होता है।
मस्तिष्क विकसित होता है यह शिशु प्रजक होते हैं।
उदाहरण :  मक्काका, फेशिस,ratus Canis ।
(Post by Mr Sunil)


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