"अर्धनारीश्वर" क्यों कहलाए भगवान शिव जानिए एक तथ्य के द्वारा 2021
शिव अर्ध नारेश्वर है।
अक्सर यह माना जाता हैं कि यह समानता का प्रतिक है लेकिन इस छवि का तालुक समानता से भी ज्यादा तटस्थ विचारों के निरूपण् से है।
हिंदु पेराणिक शास्त्र में भगवान उस मानवीय कल्पना का प्रतिक है जो या तो स्वतंत्र शिव के रूप में पूजी जा सकती हैं या भरोसे मंद विष्णु के रूप में उधर देवी प्राकृति का प्रतिक है मानवीय कल्पना को प्रकृति की जरूरत है लेकिन इसका विपरीत सच नही है इसलिए भगवान या ईश्वर का आधा भाग देवी में बदलता है लेकिन देवी का आधा भाग कभी भी देव में नहीं बदलता है अर्ध नारी शवर् की परतिमाओ की तुलना मे कहानिया कम पायी जाती हैं ।
लिंग पुराण के अनुसार सृष्टि की शुरुआत मे एक कमल खिला उसके अंदर ब्रह्मा बैठे थे जागरूक होने पर उन्हे अकेला महसूस हुआ वे डरे हुए थे और इस प्रश्न मे पङ गए कि उनका साथ देने के लिए किसी जीव का निर्माण कैसे कर सकते है l अचानक उन्हे आँखों के सामने शिव का आभास हुआ शिव का दाहिना हिस्सा पुरुष का था और बlयाँ हिस्सा स्त्री का इससे प्रेरित होकर ब्रम्हा ने अपने आप को दो हिस्सों में बाट दिया दाएँ हिस्से से सभी पुरूष जीव आये और बाये से सभी स्त्री जीव।
नाथ जोगियों मौखिक परंपरा मे कहते है कि जब वो शिव जी से मिलने गए तो देख के हैरान हो गये शिव पार्वती के साथ आलिंगन मेंइतने तल्लीन थे उन्होंने जोगियों की और देखा तक नही l
तब वे समझ गए की शिव पार्वती के आलिंगन को रोकना शरीर के दाएँ हिस्से को बाये से अलग करना जैसे होगा l इसलिए उन्होंने तब शिव को प्रणाम कर उन्हे अर्ध नारी स्वर के रूप मे कल्पित किया l
दक्षिण भारत के मंदिरों में शिव की और स्नेह से देखता हुआ भ्रंगी नामक व्यक्ति दिखाई देता है l भ्रंगी शिव के दूसरे उपसको से अलग है- वह दुर्बल है दर असल उसकी सिर्फ हड्डिया नजर आती हैं उसके दो नही बल्कि तीन पैर है कहते है की भ्रंगी शिव का उपासक था।
1 दिन कैलाश पर्वत पर आकर उसने शिव की प्रदक्षिणा करने की इच्छा व्यक्त की।
प्रदक्षिणा के समय पार्वती ने मांग की की भृंग इनके इर्द-गिर्द भी जाए। लेकिन ब्रिंग तो शिवजी से बहुत मोहित था इसलिए वह पार्वती के इर्द-गिर्द नहीं गया।
यह देख कर पार्वती शिवजी की गोद में जा बैठी और अब भृंग शिवजी और पार्वती के इर्द-गिर्द घूमने को मजबूर था।
लेकिन उसे तो सिर्फ शिव जी की प्रदक्षिणा करनी थी इसीलिए उसने अब सांप का रूप धारण कर शिव और पार्वती के बीच में खिसकने की कोशिश की।
भगवान शिव को यह मजेदार लगा और उन्होंने पार्वती को अपने शरीर का आधा हिस्सा बनाकर वे अर्धनारीश्वर मैं बदल गए।
लेकिन भृंगी ने अपनी हट नहीं छोड़ी । वह कभी चूहा कभी मधुमक्खी का रूप लेकर शिवजी और पार्वती की बीच जाने की कोशिश की।
इससे पार्वती इतनी चिढ़ गई की भ्रंगी को श्राप दिया की
वह अपनी मां के द्वारा दिए गए शरीर के सभी अंग को देंगे
भृगी के शरीर का उसी समय ख़ून ओर मांस तुरंत गायब हो गए केवल हड्डियां बच गई।
वह जमीन पर ढेर हो गया तब शिव जी ने उसको एक तीसरा पेर दे दिया।
ताकि वह तिपाई की तरह खड़ा हो सके यह घटना दर्शाती है कि ईश्वर के स्त्रेंन भाग को ना पूजने का खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
(Post by Mr Sunil)
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