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14 जुल॰ 2023

मिशन चंद्रयान 3 की महत्वपूर्ण बातें 2023


मिशन चंद्रयान-3 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा भारतीय चंद्रमा मिशन का तीसरा मिशन है। यह मिशन चंद्रयान-2 के बाद आगे की उच्चतम सर्वोच्चता को प्राप्त करने का प्रयास है। यहां नीचे मिशन चंद्रयान-3 की कुछ महत्वपूर्ण बातें हैं:


मिशन का उद्देश्य: मिशन चंद्रयान-3 का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा के पास वस्त्र मिश्रित पानी (वॉटर आइस) की खोज करना है। इसके अलावा यह मिशन चंद्रयान-2 द्वारा शुरू किए गए चंद्रमा के उपकरणों के आगे की खोज और तकनीकी प्रगति को भी बढ़ाने का लक्ष्य रखता है।

अद्यतन किए गए प्रौद्योगिकी: मिशन चंद्रयान-3 में कई प्रौद्योगिकीयाँ मिश्रित की गई हैं। इसमें संकलन और प्रसंस्करण के लिए उपकरणों, स्वचालित अन्वेषण और प्राप्ति उपकरणों, नवीनतम नेविगेशन तकनीक, स्वचालित रूप से चंद्रमा की सतह को छूने वाले उपकरणों, और नई सूर्य चार्ज़ बैटरी तकनीक शामिल हैं।


चंद्रमा पर उपकरणों की ताकत: मिशन चंद्रयान-3 के तहत भारत चंद्रमा पर कई उपकरणों को भेजेगा जो विभिन्न परीक्षण और अनुसंधान कार्यों के लिए उपयोगी होंगे। इनमें शामिल हो सकते हैं उच्च-संकलन रेडार, ज़बरदस्ती रवाना करने वाला वाहन, सूर्य की किरणों को संग्रह करने का उपकरण, सतही विज्ञान और पाठशाला उपकरण, संगठित जनसंचार उपकरण, विज्ञान अध्ययन करने के लिए विज्ञान लैब आदि।

मिशन की योजना: मिशन चंद्रयान-3 में योजना यह है कि एक चंद्रमा रवाना करने वाली वाहन संचालित किया जाएगा, जिसमें विभिन्न उपकरण स्थापित होंगे। चंद्रमा पर पहुंचने के बाद, उपकरणों को उनके कार्यों को पूरा करने के लिए सक्रिय किया जाएगा। इन उपकरणों का उपयोग चंद्रमा की सतह का मैपिंग, चंद्रमा के उपकरणों का अवलोकन, रोवर के माध्यम से नमूने के संग्रह और उपकरणों के बीच संचार जैसे कार्यों के लिए होगा।

मिशन चंद्रयान-3 भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है जो चंद्रमा के संबंधित अनुसंधान और प्रौद्योगिकी में भारत को आगे बढ़ाने में मदद करेगा।


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12 जून 2021

Varieties of Watermelon|तरबूज की अलग-अलग प्रकार की किस्म 2023.

तरबूज की अलग-अलग प्रकार की किस्मैं :
(Varieties of Watermelon)

तरबूज कई Varieties में, अलग-अलग आकार और रंगों में भी मिलता है।
छोटे बच्चे हो या बड़े गर्मी में राहत पाने के लिए सभी को तरबूज खाना बहुत पसंद होता है आपने कुछ ही प्रकार के तरबूज देखे होंगे बात करते हैं अलग-अलग प्रकार और आकार के तरबूज की।
Varieties of Watermelon|तरबूज की अलग-अलग प्रकार की किस्म 2021.

क्या आपने तरबूज की अलग-अलग प्रजाति है के बारे में सुना है?

आइए जानते हैं तरबूज की अलग-अलग वैराइटीज के बारे में -:

यह दुनिया भर में करीब 96 से अधिक देशों में उगाया जाता है और पूरी दुनिया में इसकी बारह सौ से भी अधिक वैराइटीज पाई जाती है।

तरबूज में ताजा टमाटर की तुलना में एंटी ऑक्सीडेंट लाइकोपीन अधिक होता है एक कप तरबूज में कच्चे टमाटर के मुकाबले करीब डेढ़ गुना लाइकोपीन होता है।

हमने तरबूज के अंदर का हिस्सा लाल देखा है लेकिन ऐसे भी तरबूज है जिन का अंदर का हिस्सा पीला नारंगी सफेद तथा हरा भी होता है।
Varieties of Watermelon|तरबूज की अलग-अलग प्रकार की किस्म 2021.

अमेरिका में 300 से अधिक प्रकार के तरबूज हुआ है जाते हैं तरबूज के उत्पादन के लिए अमेरिका संसार में चौथे नंबर पर है।
अमेरिका में बीज रहित seedless तरबूज उगाए जाते हैं बीज रहित तरबूज उगाने की शुरुआत आज से करीब 50 साल पहले हुई थी।

तरबूज को चीन देश में उपहार के तौर पर दिया जाता है।

जापान में दिल के आकार का तरबूज पाया जाता है।
Varieties of Watermelon|तरबूज की अलग-अलग प्रकार की किस्म 2021.

 इसके अलावा स्क्वायर ट्रायंगल और ह्यूमन फेस्ड शेप के तरबूज भी उगाए जाते हैं।
Varieties of Watermelon|तरबूज की अलग-अलग प्रकार की किस्म 2021.

तरबूज सेहत के लिए अच्छा होता है क्योंकि इसमें कोलेस्ट्रॉल और वसा नहीं होता यह विटामिन ए विटामिन सी तथा पोटेशियम का एक अच्छा सोर्स है।

जापान में बिल्कुल चौकोर तरबूज मिलते हैं जिसकी कीमत $100 से भी अधिक हो सकती है यह दुनिया भर के सबसे महंगे फलों में से एक है।

तरबूज में 92% पानी होता है जो गर्मियों मैं बहुत फायदेमंद होता है।

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7 जून 2021

Know why this happens? 2023||ऐसा क्यों होता है?

Know why this happens? 2023||ऐसा क्यों होता है?

✔️जहां ज्यादा पेड़ ,वहां ज्यादा बारिश क्यों होती है?

हमारा पर्यावरण: 

कभी ना होगा अपना मंगल काट दिए जो हमने जंगल।।

नाचे मोर कोयल भी गाये आवो पर्यावरण बचाएं।।

प्रकाश संश्लेषण (फोटोसिंथेसिस) की प्रक्रिया मैं CO2 (कार्बन डाइऑक्साइड) लेने और ऑक्सीजन बाहर निकालने के दौरान पेड़ों और उनकी पत्तियां मैं मौजूद पानी वास पानी भाप बनकर उड़ता रहता है लेकिन यह प्रक्रिया हमें दिखाई नहीं देती ।
Know why this happens? 2021||ऐसा क्यों होता है?

तेज गर्मी पड़ने पर समुद्र नदी झील का पानी सूर्य की तपिश से वाष्प बनकर उड़ जाता है इसी वाष्पीकरण के कारण आसमान में बादल बनते हैं उन बादलों में पेड़ों से वाष्प बनकर उड़ने वाला पानी भी मिल जाता है इससे बादल भारी हो जाते हैं और बरस पड़ते हैं।
 इसीलिए जिस स्थान पर पेड़ ज्यादा होते हैं वहां पानी ज्यादा बरसता है।

अगर राजस्थान की बात करें तो राजस्थान राज्य में पेड़ों की कमी है इसीलिए वहां बादल तो बनकर उड़ते हैं लेकिन अक्सर पेड़ों द्वारा वाष्पीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के चलते बादल भारी नहीं होते और हवा के साथ आगे निकल जाते हैं माना जाता है कि जितने घने जंगल होते हैं वहां उतनी ज्यादा बारिश होती है।

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16 मार्च 2021

10 मनोवैज्ञानिक तथ्य जिसे कोई नहीं जानता।2021

10 मनोवैज्ञानिक तथ्य जिसे कोई नहीं जानता।2021

आइए जानें!

1.20 सेकंड के लिए किसी भी व्यक्ति को गले लगाने से हमारे शरीर में ऑक्सीटोसिन का स्त्राव होता है, जिसके कारण आप किसी पर अधिक विश्वास कर सकते हैं।

2. डार्क चॉकलेट में एक ऐसा रसायन होता है जो हमारे शरीर में फेनिलथाइलमाइन में बदल जाता है, जो मूड को शांत करता है और आपके तनाव के स्तर को कम करता है।

3. नकारात्मक चीजों को लिखना और उन्हें कचरे के डिब्बे में फेंकना, एक मनोवैज्ञानिक चाल है जो आपके मनोदशा को सुधार सकती है।

4. प्यार पाना सबकी टाइमिंग है। मनोविज्ञान कहता है कि सही व्यक्ति को खोजना संभव है, लेकिन गलत समय पर।

5. तेज बुद्धि और उच्च बुद्धि स्तर वाले लोग रात को देर से सोने की संभावना रखते हैं।

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मानव शरीर से जुड़े 5 बड़े रहस्य?

6. दिल टूटना या प्यार में धोखा खाने वाले व्यक्ति की मरने की संभावना अधिक होती है। इसे स्ट्रेस कार्डियोमायोपैथी कहा जाता है।

7. नजरअंदाज करने एक गहरी चोट लगने के बराबर कष्ट देता है

8. लगभग 68% लोग प्रेत कंपन सिंड्रोम से पीड़ित हैं। इसमें हम अपने फोन को वाइब्रेट करते हुए महसूस करते हैं जबकि फोन वास्तव में वाइब्रेट नहीं कर रहा है।

9. कई अध्ययनों से पता चला है कि औसत महिलाएं 47 घंटे और 15 मिनट से अधिक समय तक कोई गुप्त बात नहीं रख सकती हैं।

10. अगर आप अपने पसंदीदा गाने को अपना अलार्म बनाते हैं तो आप उसे नापसंद करने लगते हैं।


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मानव में रक्त समूह (blood group) के प्रकार समझाइए??

Scientific names of animals? /जंतुओं के वैज्ञानिक नाम??

जीवाणु या बैक्टीरिया क्या है इनकी संरचना द्वारा समझाइए??

विषाणु या वायरस क्या है चित्र द्वारा समझाइए??

डीएनए क्या है हमारे शरीर में किस प्रकार अहम भूमिका निभाता है??

उल्का पिंड क्या है यह कहां से आते हैं और यह किस प्रकार बनते हैं??

Zika virus क्या है यह कौन कौन से रोग उत्पन्न कर सकते हैं समझाइए??

12वीं में साइंस सब्जेक्ट वाले स्टूडेंट आगे फील्ड में कौन-कौन से क्षेत्र में उन्हें काम करना चाहिए??

(Post by Mr Sunil)
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3 फ़र॰ 2021

अर्धनारीश्वर क्यों कहलाए भगवान शिव-2021

"अर्धनारीश्वर" क्यों कहलाए भगवान शिव जानिए एक तथ्य के द्वारा 2021

शिव अर्ध नारेश्वर है।
 अक्सर यह माना जाता हैं कि  यह समानता का प्रतिक है लेकिन इस छवि का तालुक समानता से भी ज्यादा  तटस्थ विचारों के निरूपण् से है।
  हिंदु पेराणिक शास्त्र में भगवान उस मानवीय कल्पना का प्रतिक है जो या तो स्वतंत्र शिव के रूप में पूजी जा सकती हैं या भरोसे मंद विष्णु के रूप में उधर देवी प्राकृति का प्रतिक है मानवीय कल्पना को प्रकृति की जरूरत है लेकिन इसका विपरीत सच नही है इसलिए भगवान या ईश्वर का आधा भाग देवी में बदलता है लेकिन देवी का आधा भाग कभी भी देव में नहीं बदलता है अर्ध नारी शवर् की परतिमाओ की तुलना मे कहानिया कम पायी जाती हैं ।
                    लिंग पुराण के अनुसार  सृष्टि की शुरुआत मे एक कमल खिला उसके अंदर ब्रह्मा बैठे थे जागरूक होने पर उन्हे अकेला महसूस हुआ वे डरे हुए थे और इस प्रश्न मे पङ गए कि उनका साथ देने के लिए किसी जीव का निर्माण कैसे कर सकते है l अचानक उन्हे आँखों के सामने शिव का आभास हुआ शिव का दाहिना हिस्सा पुरुष का था और बlयाँ हिस्सा स्त्री का इससे प्रेरित होकर ब्रम्हा ने अपने आप को दो हिस्सों में बाट दिया दाएँ हिस्से से सभी पुरूष जीव आये और बाये से सभी स्त्री जीव।

    नाथ जोगियों मौखिक परंपरा मे कहते है कि  जब वो शिव जी से मिलने गए तो देख के हैरान हो गये शिव पार्वती के साथ  आलिंगन मेंइतने तल्लीन थे उन्होंने जोगियों की और देखा तक नही l 
  तब वे समझ गए की शिव पार्वती के आलिंगन को रोकना शरीर के दाएँ हिस्से को बाये से अलग करना जैसे होगा l इसलिए उन्होंने तब शिव को प्रणाम कर उन्हे अर्ध नारी स्वर के रूप मे कल्पित किया l 
           दक्षिण भारत के मंदिरों में शिव की और स्नेह से देखता हुआ भ्रंगी नामक व्यक्ति दिखाई देता है l भ्रंगी शिव के दूसरे उपसको से अलग है- वह दुर्बल है दर असल उसकी सिर्फ हड्डिया नजर आती हैं उसके दो नही बल्कि तीन पैर है कहते है की भ्रंगी शिव का उपासक था।
1 दिन कैलाश पर्वत पर आकर उसने शिव की प्रदक्षिणा करने की इच्छा व्यक्त की।
प्रदक्षिणा के समय पार्वती ने मांग की की भृंग इनके इर्द-गिर्द भी जाए। लेकिन ब्रिंग तो शिवजी से बहुत मोहित था इसलिए वह पार्वती के इर्द-गिर्द नहीं गया।
यह देख कर पार्वती शिवजी की गोद में जा बैठी और अब भृंग शिवजी और पार्वती के इर्द-गिर्द घूमने को मजबूर था।

लेकिन उसे तो सिर्फ शिव जी की प्रदक्षिणा करनी थी इसीलिए उसने अब सांप का रूप धारण कर शिव और पार्वती के बीच में खिसकने की कोशिश की।
भगवान शिव को यह मजेदार लगा और उन्होंने पार्वती  को अपने शरीर का आधा हिस्सा बनाकर वे अर्धनारीश्वर मैं बदल गए।
लेकिन भृंगी ने अपनी हट नहीं छोड़ी । वह कभी चूहा कभी मधुमक्खी का रूप लेकर शिवजी और पार्वती की बीच जाने की कोशिश की।
इससे पार्वती इतनी चिढ़ गई की भ्रंगी को श्राप दिया की
वह अपनी मां के द्वारा दिए गए शरीर के सभी अंग को देंगे
भृगी के शरीर का उसी समय ख़ून ओर मांस तुरंत गायब हो गए केवल हड्डियां बच गई।
वह जमीन पर ढेर हो गया तब शिव जी ने उसको एक तीसरा पेर दे दिया।  
ताकि वह तिपाई की तरह खड़ा हो सके यह घटना दर्शाती है कि ईश्वर के स्त्रेंन भाग को ना पूजने का खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

(Post by Mr Sunil)
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31 जन॰ 2021

गुनगुना पानी पीने के फायदे| पानी पीने का सही तरीका 2021

गुनगुना पानी पीने के फायदे :

जैसा कि आप जानते हैं पानी हमारे शरीर के लिए बहुत महत्वपूर्ण तत्व है।
और यदि हम बात करें सर्दियों के मौसम की तो सर्दियों में गुनगुना पानी पीने की सलाह दी जाती है।
क्या आपने कभी सोचा है गुनगुना पानी पीने से क्या फायदे होते हैं।
आज हम आपको बताने वाले हैं गुनगुना पानी पीने के फायदे।
गुनगुना पानी पीने से हम आसानी से निरोग  रह सकते हैं
जिससे हमारा शरीर बेहतर तरीके से काम करता है।


आइए जानते हैं इसके फायदे के बारे:

पाचन ठीक रहता है

गुनगुना पानी पीने से पाचन क्रिया ठीक रहती है विशेषज्ञ सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीने की सलाह देते हैं
हमें एक से दो गिलास पानी सुबह जरूर लेना चाहिए।
जब हम रात को सोते हैं तो हमारा शरीर निष्क्रिय और सुस्त रहता है जो गुनगुना पानी पीने से क्रियाशील ऊर्जावान हो जाता है
सर्दियों में आंतों की जकड़न बढ़ जाती है जिस से मल के निष्कासन में कठिनाई आती है गुनगुना पानी की इस कठिनाई को आसान बनाता है।
खाना खाने के बाद भी हमें गुनगुना पानी पीना चाहिए।

ये लाभ भी है:

गुनगुना पानी पीने से रक्त संचार अच्छा रहता है हमारे शरीर में रक्त का परिसंचरण अच्छे से हो पाता है।
गुनगुना पानी पीने से रोग प्रतिरक्षण क्षमता भी बढ़ती है

नाक गले में जमाव नहीं होता है तथा बालों का टूटना और जड़ना से छुटकारा मिल जाता है
यह पेट दर्द को भी कम कर देता है उसके साथ ही जो लोग अपने ज्यादा वजन को लेकर परेशान हैं उनके लिए यह गुनगुना पानी वरदान की तरह काम करता है
मोटे लोगों यानी ज्यादा भारी वजन वाले लोगों का वजन कम करता है।
गुनगुना पानी पीने से हमारा शरीर अच्छा एकदम फिट हेल्थी रहता है
यह गले में होने वाले संक्रमण को रोकता है नियमित गुनगुने पानी के सेवन से गले में उपस्थित बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं और गले के संक्रमण से राहत मिलती है।

उम्र के साथ जरूरत

एक छोटे बच्चे को कितना पानी पीना चाहिए यह उसके उम्र लिंग और वजन पर निर्भर करता है।
हमारे शरीर को ढाई से 3 लीटर पानी की रोजाना जरूरत पड़ती है जिसमें से आधा पानी किडनी फेफड़े और त्वचा द्वारा शोक लिया जाता है

पानी कैसे पिए?

बोतल से पानी पीने की सलाह कभी नहीं दी जाती है क्योंकि बोतल से पानी पीने का तरीका बिल्कुल गलत है हम आपको सही तरीका बता रहे हैं पानी पीने के लिए  गिलास ही यूज़ करें और पानी को धीरे-धीरे भी है जिससे हमारे मुंह में उपस्थित लार पानी में मिल सके और और पेट में उपस्थित अम्ल या एसिड की तीव्रता को कम कर सके।
बोतल से पानी पीने से से लार पानी में नहीं मिल पाती
लोग पानी खड़े खड़े भी पीते हैं जो कि गलत है
जब हम खड़े-खड़े पानी पीते हैं तो उस समय हमारे शरीर में खून का प्रवाह हाथ और पैरों की तरफ ज्यादा होता है


Post by Mr Sunil

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22 अक्टू॰ 2020

मानव शरीर के अंग तन्त्र 2023|Human body system2021.

मानव शरीर के अंग तन्त्र 2023|Human body system2023:

हेलो भाई लोगों कैसे हो आप सभी आज हम मानव शरीर के अंग तंत्र के बारे में पढ़ने वाले हैं।

मानव शरीर में कौन-कौन से अंग तंत्र होते हैं?
अंग तंत्र के प्रकार?
पाचन तंत्र क्या है?
स्वसन तंत्र क्या है?
परिसंचरण तंत्र क्या है?
मस्तिष्क?
समन्वय तंत्र क्या है?
उत्सर्जन तंत्र?
रक्त परिसंचरण तंत्र?
प्रजनन तंत्र?
कंकाल तंत्र?


अंग तंत्र अंगों का एक समूह है जो एक कार्य विशेष को अकेले या समूहिक रूप से मिल कर करते हैं। मानव शरीर के विभिन्न अंग तंत्र हैं– पाचन तंत्र, परिसंचरण तंत्र, अंतःस्रावी तंत्र, उत्सर्जन तंत्र, प्रजनन तंत्र, तंत्रिका तंत्र, श्वसन तंत्र, कंकाल तंत्र और मासंपेशी तंत्र।

इन अंगों के अलग अलग कार्य होते हैं लेकिन ये एक दूसरे से अलग होकर स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर सकते हैं| ये मानव शरीर में एक दूसरे से संपर्क में रहते हैं और अपने काम जैसे शरीर में हार्मोन्स के उत्पादन को विनियमित करने, शरीर की रक्षा और गतिशीलता प्रदान करने, शरीर के तापमान को नियंत्रित करने आदि के लिए एक दूसरे पर निर्भर रहते हैं।

मानव शरीर के तंत्रः  

1. पाचन तंत्रः  

मानव पाचन तंत्र एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें बड़े जैविक तत्वों को छोटे कणों में तोड़ा जाता है जिसका प्रयोग शरीर ईंधन के तौर पर करता है। पोषक तत्वों को छोटे कणों में तोड़ने के लिए मुंह, पेट, आंतों और जिगर में उपस्थित विशेष कोशिकाओँ से निकलने वाले कई एन्जामों के समन्वय की आवश्यकता होती है। मानव पाचन तंत्र के विभिन्न अंगों का क्रम इस प्रकार हैः मुंह, ग्रासनली (भोजन नली), पेट, छोटी आंत और बड़ी आंत। मानव पाचन तंत्र से जुड़ी ग्रंथियां हैं– लार ग्रंथी, यकृत और अग्न्याशय।

पाचन प्रक्रिया में एन्जाइम् महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं औऱ पाचन की क्रिया मुंह में शुरु होती है एवं छोटी आंत में समाप्त होती है। बड़ी आंत में किसी प्रकार का पाचन कार्य नहीं होता है| इसमें उपस्थित जीवाणु विटामिन B और विटामिन K का उत्पादन करते हैं।



2. श्वसन तंत्रः  

भोजन से ऊर्जा निर्गमन करने की प्रक्रिया श्वसन कहलाती है। इसके अंतर्गत कोशिकाओं में ऑक्सीजन ग्रहण करना, उस ऑक्सीजन का इस्तेमाल भोजन को जलाकर ऊर्जा प्राप्त करने में करना और फिर शरीर से अपशिष्ट पदार्थ कार्बन–डाईऑक्साइड और पानी को बाहर निकालना शामिल है।


भोजन + ऑक्सीजन -------> कार्बन डाईऑक्साईड + पानी + ऊर्जा

श्वसन प्रक्रिया में ऊर्जा का निर्गमन शरीर की कोशिकाओं के भीतर होता है। इसके अलावा, जीवन के लिए श्वसन अनिवार्य है क्योंकि यह जीवों को जीवत रखने के लिए अनिवार्य सभी प्रक्रियाओं को करने के लिए ऊर्जा मुहैया कराता है।

बाहरी श्वसन

आंतरिक श्वसन

1. बाहरी श्वसन  फेफड़ों और रक्त में गैसों (O2,CO2) के आदान-प्रदान की प्रक्रिया है।

1. आंतरिक श्वसन रक्त और कोशिकाओं के बीच गैसों के आदान–प्रदान की प्रक्रिया है।

2. बाहरी श्वसन के दौरान, ऑक्सीजन रक्त में जाता है और CO2 रक्त से बाहर निकलता है|

2. आंतरिक श्वसन के दौरान, रक्त द्वारा ले जाया जाने वाला ऑक्सीजन ऊतकों में जाता है और ऊतकों से CO2 बाहर निकलता है|

3. यह श्वसन का पहला चरण होता है।

3. यह श्वसन का दूसरा चरण होता है।

4. इसमें दो चरण होते हैं– सांस लेना और सांस छोड़ना|

4. इसमें कोई उपचरण नहीं होता है|

5. इस प्रक्रिया में रक्त में ऑक्सीजन बाहरी स्रोतों ( हवा/पानी) से पहुंचता है।

5. इस प्रक्रिया में ऊतक रक्त से ऑक्सीजन अवशोषित करते हैं।

6. इस प्रक्रिया में कार्बनडाईऑक्साइड ऊतक से निकलकर शरीर से बाहर चला जाता है।

6. इस प्रक्रिया में कार्बनडाईऑक्साइड ऊतक से निकलकर रक्त में जाता है।

श्वसन की प्रक्रिया में शामिल हैः शरीर में वायु लेना और बाहर निकालना; ऊर्जा पैदा करने के लिए वायु से ऑक्सीजन का अवशोषण; कार्बन डाईऑक्साइड का निस्तारण जो इस प्रक्रिया में उत्पाद के रूप में निकलता है|

12 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों और व्यस्कों में श्वसन की सामान्य दर प्रति मिनट 14 से 18 श्वास होती है।

निःश्वसन: हवा को भीतर की ओर खींचना जिसके कारण वक्ष गुहा के आयतन में वृद्धि होती है।

उच्छ्श्वसन: हवा को बाहर निकलना जिसके कारण वक्ष गुहा के आयतन में कमी होती है।

जैविक विज्ञान में आविष्कार और खोज की सूची

श्वसन के प्रकार:

वायवीय/ऑक्सी श्वसन

अवायवीय/अनॉक्सी श्वसन

1. वायवीय श्वसन में ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है|

1. अवायवीय श्वसन की क्रिया ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होती है|

2. अधिकांश पादप एवं जन्तु कोशिकाओं में वायवीय श्वसन की क्रिया होती है|

2. अवायवीय जीवाणु, यीस्ट की कोशिकाओं, प्रोकैरियोटीज और मांसपेशी कोशिकाओं में अवायवीय श्वसन की क्रिया होती है|

3. वायवीय श्वसन अवायवीय श्वसन की अपेक्षा अधिक प्रभावकारी होता है| इसमें ग्लूकोज के 1 अणु से ATP के 38 अणु बनते हैं|

3. अवायवीय श्वसन वायवीय श्वसन की अपेक्षा कम प्रभावकारी होता है| इसमें ग्लूकोज के 1 अणु से ATP के 2 अणु बनते हैं|

4. वायवीय श्वसन की क्रिया सामान्यतः माइटोकॉन्ड्रिया में होती है|

4. अवायवीय श्वसन की क्रिया सामान्यतः कोशिका द्रव्य में होती है|

5. वायवीय श्वसन की क्रिया के अंत में उत्पाद के रूप में कार्बन डाईऑक्साइड और जल प्राप्त होते हैं|

5. अवायवीय श्वसन की क्रिया के अंत में उत्पाद के रूप में कार्बन डाईऑक्साइड और इथाईल एल्कोहल या लैक्टिक अम्ल प्राप्त होते हैं|

6. वायवीय श्वसन की क्रिया में उर्जा मुक्त होने में अधिक समय लगता है|

6. अवायवीय श्वसन की क्रिया बहुत कम समय में सम्पन्न होती है|

3. परिसंचरण तंत्र :

मनुष्यों में मुख्य परिसंचरण तंत्र 'रक्त परिसंचरण तंत्र' है। परिसंचरण तंत्र को द्वि परिसंचरण तंत्र भी कहा जाता है क्योंकि यह दो फंदों (लूप्स) से बना होता है और रक्त हृदय से होकर दो बार गुजरता है। हृदय इस तंत्र के केंद्र में होता है और दो भागों में बंटा होता है– दायां और बायां।

इस तंत्र में रक्त ऑक्सीजन, पचा हुआ भोजन और अन्य रसायनों जैसे हार्मोन एवं एन्जाइम को शरीर के अन्य हिस्सों में लेकर जाता है। साथ ही यह यकृत कोशिकाओं द्वारा उत्पादित अपशिष्ट या उत्सर्जक उत्पादों जैसे कार्बन डाईऑक्साइड और यूरिया को भी बाहर निकालने का काम करता है।

मानव के रक्त परिसंचरण तंत्र में हृदय (वह अंग जो रक्त को पंप करता है और पुनः प्राप्त करता है) और रक्त वाहिकाएं या नलिकाएं होती हैं जिसके माध्यम से शरीर में रक्त का प्रवाह होता है। रक्त तीन प्रकार की रक्त वाहिकाओं से प्रवाहित होती है:

(i) धमनियां

(ii) नसें और

(iii) केशिकाएं

परिसंचरण तंत्र की रक्त वाहिकाएं मनुष्य के शरीर के प्रत्येक अंग में मौजूद होती हैं। इनके द्वारा ही रक्त शरीर के सभी अंगों तक पहुंचता है।


4. नियंत्रण और समन्वय तंत्र :

उच्च श्रेणी के पशुओं जिन्हें कशेरुकी (मनुष्यों समेत) कहा जाता है, में नियंत्रण और समन्वय तंत्रिका तंत्र के साथ– साथ हार्मोन तंत्र जिसे अंतःस्रावी तंत्र कहा जाता है, के माध्यम से होता है।
   न्यूरॉन कोशिका

तंत्रिका कोशिकाओं से बने तंत्र को तंत्रिका तंत्र कहते हैं और इसका काम हमारे शरीर की गतिविधियों के बीच समन्वय स्थापित करना होता है। इसलिए, यह हमारे शरीर को मिलकर काम करने में मदद करता है। तंत्रिका तंत्र विशेष प्रकार की कोशिकाओं से बना होता है जिसे न्यूरॉन्स कहते हैं। ये शरीर की सबसे बड़ी कोशिका होती है। तंत्रिका तंत्र के मुख्य अंग हैः मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और नसें। मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी हमारे शरीर की सभी इंद्रियों और अन्य अंगों से लाखों नसों से जुड़े होते हैं।


 मानव मस्तिष्क

विभिन्न प्रकार के अंतःस्रावी हार्मोन उत्पादित करने वाले अंतःस्रावी ग्रंथियों के समूह को अंतःस्रावी तंत्र कहते हैं। तंत्रिका तंत्र के साथ मिल कर अंतःस्रावी तंत्र हमारे शरीर की गतिविधियों के बीच समन्वय स्थापित करने में भी मदद करते हैं। हमारे शरीर में मौजूद अंतःस्रावी ग्रंथियां हैं– शीर्षग्रंथि, हाइपोथैलमस ग्रंथि, पिट्यूटरी ग्रंथि, थायराइड ग्रंथि, पाराथायराइड ग्रंथि, थैलमस, अग्न्याशय, अधिवृक्क ग्रंथि, वृषण (सिर्फ पुरुषों में) और अंडाशय (सिर्फ महिलाओं में)|



अंतःस्रावी ग्रंथियों द्वारा उत्पादित हार्मोन हमारे शरीर के अंगों और तंत्रिका तंत्र के बीच संदेशवाहक का काम करते हैं।

मनुष्य का उत्सर्जन तंत्र किस तरह से कार्य करता है?

5. उत्सर्जन तंत्र:

मनुष्यों में, एक अंग तंत्र द्वारा उत्सर्जन का कार्य किया जाता है, जिसे मूत्र तंत्र या उत्सर्जन तंत्र कहते हैं। इसमें निम्नलिखित अंग होते हैं– सेम के बीज के आकार के दो गुर्दे जो पेट के बीच के हिस्से के नीचे और पीछे की तरफ रहते हैं, दो उत्सर्जक नलियां या मूत्रवाहिनियां जो दोनों गुर्दे से जुड़े होते हैं, एक मूत्राशय जिसमें मूत्रवाहिनी खुलती हैं और एक मांसल नली जिसे मूत्रमार्ग कहते हैं जो मूत्राशय से निकलती है। मूत्रमार्ग के अंतिम सिरे पर मूत्रत्याग स्थान होता है। इसके अलावा, उत्सर्जन के दो मुख्य प्रक्रियाएं होती हैं– निस्पंदन और पुनः अवशोषण। दोनों गुर्दे न सिर्फ नाइट्रोजन वाले अपशिष्टों को बाहर निकालने का काम करते हैं बल्कि यह शरीर में पानी की मात्रा को विनियमित (परासरणनियमन– osmoregulation) भी करते हैं और रक्त में खनिजों का संतुलन समान्य बनाए रखते हैं। नेफ्रॉन गुर्दे का संरचनात्मक और कार्यात्मक हिस्सा होता है।

गुर्दे का काम विषैले पदार्थ यूरिया, अन्य अपशिष्ट लवणों और रक्त से अतिरिक्त पानी को बाहर करना और पीलापन लिए तरल मूत्र के रूप में उनका उत्सर्जन करना होता है।


6. प्रजनन तंत्र

एक ही प्रजाति के मौजूद जीवों से नए जीवों की उत्पत्ति को प्रजनन कहते हैं। पृथ्वी पर प्रजातियों के अस्तित्व के लिए यह अनिवार्य है। प्रजनन में जीव अपने माता– पिता के जैसे मूल गुणों के साथ पैदा होता है। जीवों में प्रजनन के दो मुख्य तरीके होते हैं:

(a) अलैंगिक प्रजनन

(b) लैंगिक प्रजनन

अलैंगिक प्रजनन: एकल जनक द्वारा यौन कोशिकाओं या युग्मक के सहयोग के बिना नए जीव को जन्म देना। उदाहरणः अमीबा में होने वाला द्विआधारी विखंडन, हाइड्रा में कोंपल निकला, राइजोपस कवक में बीजाणु का बनना, प्लानारिया (flarworm) में पुनर्जनन, स्पाइरोगाइरा में विखंडन, फूल वाले पौधों (जैसे गुलाब का पौधा) में वनस्पति विस्तार।


  अमीबा का द्विआधारी विखंडन

लैंगिक प्रजनन: दो जीवों, माता–पिता, द्वारा उनके यौन कोशिकाओं या युग्मकों का प्रयोग कर नए जीव को जन्म देना। यौन प्रजनन में शामिल दो जीव नर और मादा होते हैं।

  मनुष्यों में यौन प्रजनन

पुरुष प्रजनन प्रणाली

7. कंकाल तंत्र:

कंकाल तंत्र हड्डियों, उससे संबद्ध उपास्थियों और मानव शरीर के जोड़ों का तंत्र होता है। व्यस्क मानव शरीर में 206 हड्डियां होती हैं। हड्डियों के अलावा कंकाल में कार्टिलेज और लिगामेंट भी होते हैं।

कार्टिलेज सघन संयोजी ऊतक होते हैं जो प्रोटीन फाइबर से बने होते हैं और जोड़ों पर हड्डियों की गतिशीलता के लिए चिकती सतह मुहैया कराते हैं। लिगामेंट रेशेदार संयोजी ऊतक का बैंड है जो हड़्डियों को एक साथ जोड़े रखता है और उनके स्थान पर उन्हें बनाए रखता है। हालांकि जोड़ मानव कंकाल का महत्वपूर्ण घटक है क्योंकि ये मानव कंकाल को गतिशील बनाता है। जोड़ "दो या अधिक हड्डियों", "हड्डियों और कार्टिलेज" एवं "कार्टिलेज और कार्टिलेज" के बीच हो सकता है।
{Post by Mr Sunil}


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7 अक्टू॰ 2020

मानव शरीर से जुड़े 5 बड़े रहस्य?

मानव शरीर से जुड़े 5 बड़े रहस्य

जैसा कि आप जानते हैं हम आपके लिए नई नई जानकारियां लाते रहते हैं और आज हम लेकर आए हैं मानव शरीर से जुड़े 5 बड़े रहस्य??
{Post by Mr Sunil}
मानव शरीर से जुड़ी कई तरह की भ्रांतियां ख़त्म होने का नाम ही नहीं लेती हैं. तमाम जागरूकता के बाद भी लोग कई मिथकों पर ज़्यादा यक़ीन करते हैं.
ऐसे में बीबीसी फ़्यूचर बता रहा है कि मानव शरीर से जुड़ी पांच भ्रांतियां!

1. मोटे लोगों में मेटोबॉलिज़्म की दर कम नहीं होती. लोग अमूमन मानते हैं कि मोटे लोगों में मेटाबॉलिज़्म की दर कम होती है. लेकिन ऐसा होता नहीं है क्योंकि मोटे लोगों के शारीरिक अंग बड़े होते हैं और पतले लोगों की तुलना में वे ज्यादा ऊर्जा खर्च करते हैं. ऐसे में मोटे लोगों के मेटाबॉलिज़्म की दर ज़्यादा होती है. इस बारे में ज़्यादा जानकारी के लिए देखें- जर्नल ऑफ़ न्यूट्रीशनल साइंसेज़.

2.अगर आपका पेट काफ़ी वज़नी हो, आप मोटे हों, तो आपके शरीर को सेब जैसा कहा जाता है जबकि अगर आपके हिप और थाई वज़नी हों तो उसे नाशपती के आकार का कहा जाता था. पहले यह माना जाता था कि सेब के आकार वाले लोगों में हृदय संबंधी रोग होने का ख़तरा ज़्यादा होता है, डायबिटीज़ होने की आशंका ज़्यादा होती है. लेकिन हाल में कैलिफ़ोर्निया यूनिवर्सिटी के अध्ययन में देखा गया है कि आपके शरीर का आकार चाहे जो हो, लेकिन अगर आपका वज़न ज़्यादा है तो वो ख़तरनाक है. ( स्रोत- यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफोर्निया, डेविस)

3. हर महिला का सपना होता है कि उनकी क़द-काठी ऑवरग्लास शेप की हो. लेकिन ऐसा होता नहीं. मैनचेस्टर में 3डी बॉडी स्कैनर से 240 ब्रिटिश महिलाओं की कद-काठी के माप में देखा गया कि 63 फ़ीसदी महिलाओं की कमर, कंधे और छाती का माप एक जैसा था. इसे आप आयाताकार कह सकते हैं. केवल 13 फ़ीसदी महिलाओं की बॉडी परफैक्ट ऑवरग्लास जैसी थी. हालांकि ये भी देखा गया कि उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं का आकार आयाताकार जैसा होता जाता है. 56 साल से ज़्यादा उम्र की 80 फ़ीसदी महिलाएं इसी वर्ग में आती हैं. ( स्रोत- मैनचेस्टर मेट्रोपॉलिटेशन यूनिवर्सिटी)

4. पुरुषों का स्तन भी कई बार बढ़ जाता है. माना जाता है कि ज्यादा बीयर पीने से ऐसा होता है. लेकिन ये स्तन में कोशिकाओं के बढ़ने से होता है. मोटे और ज़्यादा वज़नी लोगों में ऐसा होता है कि क्योंकि वसा से फ़ीमेल हार्मोन इस्ट्रोजन उत्पादित होता है जिससे स्तन बढ़ता है. ( स्रोत- यूके नेशनल हेल्थ सर्विस)

5. तुर्की के अनुसंधानकर्ताओं ने 200 पुरुषों में सर्वे करने के बाद पाया है कि जिनका वज़न अनुपात ज़्यादा होता है, यानि बीएमआई (बॉडी माल इंडेक्स) ज़्यादा होता है, वह बिस्तर पर ज़्यादा देर तक संसर्ग करने की क्षमता रखते हैं. ऐसे लोगों का औसतन संसर्ग का समय 7.3 मिनट होता है जबकि पतले लोग 2 मिनट में स्खलित हो जाते हैं. शायद पतले लोगों में टेस्टोस्टोरोन की मात्रा कम हो जाती है, यह बहुत मोटे लोगों के साथ भी होता है. मोटे लोग में सेक्स करने की क्षमता भले ज़्यादा होती है लेकिन उन्हें इसे शुरू करने में वक़्त लगता है. कई बार ज़्यादा वज़नी लोगों में सेक्स करने लायक़ इरेक्शन नहीं हो पाता है.( स्रोत- इंटरनेशनल जर्नल ऑफ़ इंपोटेंस रिसर्च)
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